कमलेश फाइटर
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में दीपके ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “मिस्टर मोदी, यू आर अ काउर्ड।” उनका यह बयान पार्टी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद सामने आया।
दीपके ने अपने वीडियो में आरोप लगाया कि दो युवा नेताओं को जेल में रखकर सरकार अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस और प्रशासनिक तंत्र के सहारे विरोध करने वाले युवाओं को हिरासत में रखना ही ताकत का परिचायक है। उन्होंने कहा कि वास्तविक साहस उस व्यक्ति में होता है, जो अपने से अधिक शक्तिशाली व्यवस्था के सामने खड़े होने के बावजूद अपने विचारों से पीछे नहीं हटता।
दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका का उल्लेख करते हुए कहा कि कई दिनों तक जेल में रहने और न्यायिक हिरासत बढ़ने के बावजूद दोनों के चेहरे पर मुस्कान और उनके हौसले में कमी नहीं आई। उन्होंने सौरव की मां का जिक्र करते हुए भी कहा कि बेटे के जेल में होने के बावजूद परिवार का मनोबल कमजोर नहीं पड़ा है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
सीजेपी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। दोनों को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया था। बाद में 19 अक्टूबर को अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी। दोनों को 21 अक्टूबर को फिर अदालत में पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है।
दीपके ने अपने वीडियो में हिरासत और सुनवाई में देरी को लेकर सवाल उठाए तथा आरोप लगाया कि युवाओं को डराकर विरोध की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अपने साथियों के व्यवहार को साहस का उदाहरण बताते हुए कहा कि वास्तविक ताकत डर के आगे झुकने के बजाय अपने विचारों पर कायम रहने में है।
राजनीतिक विरोध और कानूनी प्रक्रिया पर बहस
सीजेपी के नेताओं की गिरफ्तारी और हिरासत बढ़ने का मामला राजनीतिक विरोध के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस का विषय बन गया है। पार्टी और उसके समर्थक कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि मामले में पुलिस के आरोपों तथा अदालत की कार्यवाही को उनके कानूनी संदर्भ में देखना जरूरी है।
दीपके का वीडियो सरकार की आलोचना के साथ युवाओं को डर के आगे न झुकने का संदेश भी देता है। अब इस मामले में 21 अक्टूबर की अगली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।
नोट: दीपके के बयान में लगाए गए आरोप उनके अपने दावे हैं। न्यायिक हिरासत बढ़ाया जाना अपने आप में आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं है।





