कमलेश फाइटर
शाहजहांपुर/कानपुर। रसोई में इस्तेमाल होने वाली हल्दी की शुद्धता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले ने खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामला गोल्डी ब्रांड के हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट पाए जाने का है। अदालत के 10 फरवरी 2025 के फैसले में प्रयोगशाला की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उत्पाद को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए जाने की बात दर्ज की गई।
हाईकोर्ट में पीयूष गुप्ता एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य, याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने शाहजहांपुर के एक रेस्टोरेंट संचालक और उसके कर्मचारी के खिलाफ चल रही कार्यवाही निरस्त कर दी। अदालत के सामने यह तथ्य था कि रेस्टोरेंट से गोल्डी ब्रांड की हल्दी के सीलबंद पैकेट लिए गए थे और सरकारी प्रयोगशाला की 15 मई 2023 की रिपोर्ट में लेड क्रोमेट मिलने की बात कही गई थी।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि निर्धारित परिस्थितियों में लाइसेंस प्राप्त निर्माता से उचित बिल के साथ सीलबंद खाद्य सामग्री खरीदने वाले रेस्टोरेंट को उसकी गुणवत्ता के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यदि ऐसी सामग्री असुरक्षित पाई जाती है, तो प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी निर्माता या वितरक की हो सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने निर्माता या वितरक के खिलाफ आगे की कार्यवाही करने की स्वतंत्रता निचली अदालत को दी थी। यानी अदालत ने केवल रेस्टोरेंट संचालक को राहत नहीं दी, बल्कि निर्माता की जिम्मेदारी की जांच का रास्ता भी खुला रखा।
अब खाद्य सुरक्षा विभाग से यह सवाल पूछना जरूरी है कि इस फैसले के बाद गोल्डी मसाले के संबंधित उत्पाद और बैच को लेकर क्या कार्रवाई की गई? क्या निर्माता को नोटिस दिया गया, क्या अतिरिक्त नमूने लिए गए और क्या किसी सक्षम अदालत में कार्यवाही शुरू की गई?
जनहित का सवाल: खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं रह सकती। उपभोक्ता किसी प्रतिष्ठित ब्रांड पर भरोसा करके उत्पाद खरीदते हैं। ऐसे में किसी उत्पाद के असुरक्षित पाए जाने पर निर्माता की जवाबदेही और विभाग की कार्रवाई की पारदर्शिता बेहद जरूरी है। आखिर आम आदमी की सेहत की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?
हल्दी में लेड क्रोमेट: शरीर के लिए कितना खतरनाक?
स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी
लेड क्रोमेट क्या है?
लेड क्रोमेट सीसा (Lead) और क्रोमियम का एक विषैला रासायनिक यौगिक है। इसका सेवन शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें मौजूद सीसा और हेक्सावैलेंट क्रोमियम (Chromium-6) के स्वास्थ्य जोखिम अलग-अलग भी होते हैं। 
1. मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर असर
याददाश्त, ध्यान और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
बच्चों के मानसिक विकास और बुद्धि पर स्थायी असर पड़ सकता है।
अधिक विषाक्तता में दौरे पड़ना, बेहोशी और गंभीर मस्तिष्क क्षति हो सकती है। 
1. किडनी और लिवर को नुकसान
लंबे समय तक संपर्क से किडनी की कार्यक्षमता घट सकती है। क्रोमियम-6 के संपर्क से भी किडनी और लिवर प्रभावित हो सकते हैं। 
1. खून की कमी और पेट की समस्याएं
सीसा शरीर में हीमोग्लोबिन बनने की प्रक्रिया बाधित कर सकता है, जिससे एनीमिया हो सकता है। अधिक संपर्क में पेट दर्द, कब्ज, उल्टी और गंभीर ऐंठन भी हो सकती है। 
1. ब्लड प्रेशर और प्रजनन पर असर
सीसे का संपर्क उच्च रक्तचाप और प्रजनन संबंधी समस्याओं के जोखिम से जुड़ा है। गर्भावस्था में यह भ्रूण के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है। 
1. कैंसर का खतरा
हेक्सावैलेंट क्रोमियम के संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने इसे मुंह के रास्ते लंबे समय तक शरीर में जाने पर भी संभावित कैंसरकारी माना है। हालांकि, किसी खास खाद्य नमूने से व्यक्ति को कैंसर होगा या नहीं, यह केवल इस जानकारी से तय नहीं किया जा सकता है ।
इस मामले में कमलेश फाइटर के द्वार गोल्डी मसाले समूह और सभी ज़िम्मेदार अधिकारियों को मेल के ज़रिए मेसेज भेजकर उनका पक्ष जानने के प्रयास किया गया था लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया है।





